हम सब के पास conscience का अमृत हुआ करता था पर जैसे कोई लालची दूधवाला दूध में पानी मिलता है वैसे ही हमने इस अमृत में negligence का पानी मिलाना शुरू किया। दूधवाला शुरू शुरू में थोड़ा पानी मिलाता है पर जब उसका लालच बढ़ने लगता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ाता ही चला जाता है ठीक उसी तरह हमने शुरू शुरू में negligence की मात्रा थोड़ी रखी पर जब हमारा मिलाया हुआ negligence हमे ही मात्रा बढ़ाने पे मजबूर करने लगा जैसे दवा जब मर्ज़(रोग) का सबब(कारण) बन जाती है फिर क्या था हम मिलाते गये मिलाते गये और फिर एक दिन देखा तो पाया के conscience के अमृत में conscience तो था ही नही था तो सिर्फ negligence का पानी जो अब पड़े पड़े जहर बननेवाला था।
फिर थोड़े दिन पहले ऐसा लगा के कही थोड़ा सा सही parts per million(ppm) अमृत बचा होगा जो मन के भीतर के राख़ के रेगीस्तान से phoenix रूपी conscience को जीवित कर दे। क्या ऐसा हो सकता है? अगर हा तो negligence का पानी जो अब जहर बन चुका है और कोई मामूली जहर नही ये भी किसी basilisk के जहर से कम दर्दनाक नही,इसके घाव basilisk के डंखो की तरह दिखते नही वे अंदर के घाव है अंदर से डसे हुए जो पीड़ा बहुत देते है। और अगर ऐसा सच में हो सकता है तो phoenix के आँसुओ से यह सारे घाव ठीक हो सकते है।
पर जब मैंने उस रेगीस्तान की राख को टटोला तो वहा कोई phoenix नही था,वहा regrets के चूहे मरे हुए थे जिनसे बदबू आ रही थी और जब मैं थोड़ा और आगे चला तो देखा वे सारे चूहे उसी जहरीले पानी से बह बह के वहा जमा हो रहे थे।